Posts

वीर दुर्गादास जी

  *वीर दुर्गादास राठौड़ जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन🙏🏻💐*   वीर शिरोमणि दुर्गादास राठौर का नाम मेवाड़ ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण हिन्दुस्तान के इतिहास में त्याग, बलिदान, देश -भक्ति व स्वामिभक्ति के लिये स्वर्ण अक्षरों में अमर है। आगरा में ताजमहल के निकट पुरानी मंडी चौराहे पर वीर दुर्गादास राठौर की घोड़े पर सवार प्रतिमा स्थापित है।  मारवाड़ की स्वतन्त्रता के लिये वर्षों तक संघर्ष करने वाले वीर पुरुष दुर्गा दास राठौर का जन्म जोधपुर के एक छोटे से गाँव सलवां कलां में आसकरन जी राठौर के घर 13 अगस्त, सन् 1638 (श्रावण शुक्ल चतुर्दशी सम्वत् 1695) में हुआ था। इनके पिता आसकरन जी जोधपुर नरेश महाराजा जसवन्त सिंह की सेना में थे। अपने पिता की भाँति बालक दुर्गादास में भी वीरता के गुण कूट-कूट कर भरे थे।  एक बार जोधपुर राज्य की सेना के कुछ ऊँट चरते हुये आकरन के खेत में घुस गये। बालक दुर्गादास के विरोध करने पर चरवाहों ने कोई ध्यान नहीं दिया तो वीर युवा दुर्गादास आग -बबूला हो गये और तलवार निकालकर एक ही पल में ऊँट की गर्दन उड़ा दी। बालक की इस वीरता की खबर जब जोधपुर नरेश महाराजा जसवन्त सिं...

बल्लू जी चाम्पावत

  *✊एक वीर जिसका तीन बार हुवा अंतिम संस्कार* *#प्राण_जाए_पर_वचन_ना_जाये - बल्लू जी चाम्पावत  *👉जिस समय अमरसिंहः जी राठौड़ को जोधपुर से निकाला गया था, उस समय बल्लू जी चाम्पावत भी उनके साथ हो लिए, की इस संकट की घड़ी में आपका साथ नही छोड़ सकता हुकुम !!* *👉लेकिन राज्य मिलने पर अमर सिंह को छोड़ कर चले गए, की अब आपके पास राज्य है, सेना है, सब कुछ है, मेरी फिर कभी आवश्यकता हो, तो याद कीजिये, में अवश्य आऊंगा !!* *👉यहां से बल्लू जी मेवाड़ चले गए, जहां उन्हें मेवाड़ के सरदारों ने भूखे शेर से लड़वा दिया !! बल्लू जी ने शेर को तो फाड़ दिया, लेकिन वहां से भी यह कह के चले गए* *👉"यदि आपको मुझे लड़वाना ही था , तो शत्रु से लड़वाते, एक जानवर की हत्या का पाप मुझसे करवाने की क्या जरूरत थी ।।* *👉जाते समय राणा ने उन्हें एक घोड़ा भेंट किया, ओर बल्लू जी ने कहा, संकट के समय याद कीजिये राणा जी !! अवश्य हाजिर हो जाऊंगा ।।* *👉यहां अमर सिंह जी की शाहजहां के दरबार मे हत्या हो गयी ।* *👉अमर सिंह की रानी ने जब ये समाचार सुना तो सती होने का निश्चय कर लिया, लेकिन पति की देह के बिना वह वो सती कैसे होती। रानी ने बचे ...