बल्लू जी चाम्पावत

 


*✊एक वीर जिसका तीन बार हुवा अंतिम संस्कार*

*#प्राण_जाए_पर_वचन_ना_जाये - बल्लू जी चाम्पावत 


*👉जिस समय अमरसिंहः जी राठौड़ को जोधपुर से निकाला गया था, उस समय बल्लू जी चाम्पावत भी उनके साथ हो लिए, की इस संकट की घड़ी में आपका साथ नही छोड़ सकता हुकुम !!*


*👉लेकिन राज्य मिलने पर अमर सिंह को छोड़ कर चले गए, की अब आपके पास राज्य है, सेना है, सब कुछ है, मेरी फिर कभी आवश्यकता हो, तो याद कीजिये, में अवश्य आऊंगा !!*


*👉यहां से बल्लू जी मेवाड़ चले गए, जहां उन्हें मेवाड़ के सरदारों ने भूखे शेर से लड़वा दिया !! बल्लू जी ने शेर को तो फाड़ दिया, लेकिन वहां से भी यह कह के चले गए*


*👉"यदि आपको मुझे लड़वाना ही था , तो शत्रु से लड़वाते, एक जानवर की हत्या का पाप मुझसे करवाने की क्या जरूरत थी ।।*


*👉जाते समय राणा ने उन्हें एक घोड़ा भेंट किया, ओर बल्लू जी ने कहा, संकट के समय याद कीजिये राणा जी !! अवश्य हाजिर हो जाऊंगा ।।*


*👉यहां अमर सिंह जी की शाहजहां के दरबार मे हत्या हो गयी ।*


*👉अमर सिंह की रानी ने जब ये समाचार सुना तो सती होने का निश्चय कर लिया, लेकिन पति की देह के बिना वह वो सती कैसे होती। रानी ने बचे हुए थोड़े राजपूतों सरदारो से अपनें पति की देह लाने को प्रार्थना की पर किसी ने हिम्मत नहीं कि और तब अन्त में उनको अमरसिंह के परम मित्र बल्लुजी चम्पावत की याद आई और उनको बुलवाने को भेजा !*


*👉बल्लूजी अपनें प्रिय घोड़े पर सवार होकर पहुंचे जो उनको मेवाड़ के महाराणा नें बक्शा था ! उसने कहा- 'राणी साहिबा' मैं जाता हूं या तो मालिक की देह को लेकर आऊंगा या मेरी लाश भी वहीं गिरेगी।'*


*👉वह राजपूत वीर घोड़े पर सवार हुआ और घोड़ा दौड़ाता सीधे बादशाह के महल में पहुंच गया। महल का फाटक जैसे ही खुला द्वारपाल बल्लु जी को अच्छी तरह से देख भी नहीं पाये कि वो घोड़ा दौड़ाते हुवे वहाँ चले गए जहाँ पर वीरवर अमर सिंह की देह रखी हुई थी !*

*बुर्ज के ऊपर पहुंचते-पहुंचते सैकड़ों मुसलमान सैनिकों ने उन्हें घेर लिया।* 


*👉बल्लूजी को अपनें मरने-जीने की चिन्ता नहीं थी उन्होंने मुख में घोड़े की लगाम पकड़ रखी थी,दोनों हाथों से तलवार चला रहे थे !*


*👉उसका पूरा शरीर खून से लथपथ था। सैकड़ों नहीं, हजारों मुसलमान सैनिक उनके पीछे थे जिनकी लाशें गिरती जा रही थीं और उन लाशों पर से बल्लूजी आगे बढ़ते जा रहा थे ! वह मुर्दों की छाती पर होते बुर्ज पर चढ़ गये और अमर सिंह की लाश उठाकर अपनें कंधे पर रखी और एक हाथ से तलवार चलाते हुवे घोड़े पर उनकी देह को रखकर आप भी बैठ गये और सीधे घोड़ा दौड़ाते हुवे गढ़ की बुर्ज के ऊपर चढ़ गए और घोड़े को नीचे कूदा दिया !*


 *👉नीचे मुसलमानों की सेना आने से पहले बिजली की भाँति अपने घोड़े सहित वहाँ पहुँच चुके थे जहाँ रानी चिता सजाकर तैयार थी ! अपने पति की देह पाकर वो चिता में ख़ुशी ख़ुशी बैठ गई !*


*👉सती ने बल्लू जी को आशीर्वाद दिया- 'बेटा ! गौ,ब्राह्मण,धर्म और सती स्त्री की रक्षा के लिए जो संकट उठाता है, भगवान उस पर प्रसन्न होते हैं। आपनें आज मेरी प्रतिष्ठा रखी है। आपका यश संसार में सदा अमर रहेगा।'*


*👉बल्लू चम्पावत मुसलमानों से लड़ते हुवे वीर गति को प्राप्त हुवे उनका दाहसंस्कार यमुना के किनारे पर हुआ उनके और उनके घोड़े की याद में वहां पर स्म्रति स्थल बनवाया गया जो अभी भी मौजूद है !*


*👉जैसा इसी आलेख में है की बल्लूजी के पास जो धोड़ा था जो मेवाड़ के महाराणा ने बक्शा था तब बल्लूजी ने उनसें वादा किया की जब भी आप पर कोई विपति आये तो बल्लू को याद करना मैं हाजिर हो जाऊंगा उस के कुछ वक्त बाद में मेवाड़ पर ओरेंगजेब ने हमला कर दिया तो महाराणा ने उनको याद किया और हाथ जोड़कर निवेदन किया की है बल्लूजी आज मेवाड़ को आपकी जरुरत है !*


*👉तभी जनसमुदाय के समक्ष उसी घोड़े पर बल्लूजी दिखे और देबारी की घाटी में मेवाड़ की जीत हुई ! बल्लूजी उस युद्ध में दूसरी बार काम आ गए ! देबारी में आज भी उनकी छतरी बनी हुई है !*


*🙏बल्लूजी ने एक बार अपनी विपति के दिनों में लाडनूं के एक बनिये से कुछ कर्ज लिया इसके बदले में उन्होंने अपनी मूछ का बाल गिरवी रखा जो जीते जी वो छुड़ा न सके परन्तु उनकी छः पीढ़ी बाद में उनके वंसज हरसोलाव के ठाकुर सूरतसिंह जी ने छुड़ाकर उसका विधि विधान के साथ दाह संस्कार करवाया और सारे बल्लुदासोत चम्पावत इकठे हुए औरसारे शौक के दस्तूर पुरे किये !*


*✊इस तरह एक राजपूत वीर का तीन बार दाह संस्कार हुआ जो हिन्दुस्थान के इतिहास में उनके अलावा कही नही मिलता !!*

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* जय_श्री_राम⛳⛳🚩

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